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अमृत विचार, 28 जुलाई 2026
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दैनिक जागरण, 14 जून 2026
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मितौलगढ़ नरेश महाराज लोने सिंह द्वारा रचित पांडुलिपियों का ऐतिहासिक हस्तांतरण संपन्न आज मितौलगढ़ नरेश महाराज लोने सिंह जी द्वारा रचित दुर्लभ एवं ऐतिहासिक पांडुलिपियों का औपचारिक हस्तांतरण संपन्न हुआ। यह हस्तांतरण महाराज लोने सिंह जी के राजपुरोहित वंशज श्री राम शंकर दीक्षित द्वारा किया गया। पांडुलिपियों के हस्तांतरण का प्रमुख उद्देश्य उनका वैज्ञानिक अध्ययन, डिजिटलीकरण तथा दीर्घकालीन संरक्षण सुनिश्चित करना है, जिससे यह अमूल्य धरोहर भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रह सके। इस अवसर पर श्री गोकर्ण शोध कला एवं संस्कृति संस्थान (श्री गोकर्ण फाउंडेशन द्वारा संचालित) के निदेशक श्री विक्रांत सिंह परमार एवं प्रबंध निदेशक श्री कमल नयन शुक्ला द्वारा मितौली पहुँचकर राजपुरोहित वंशज श्री राम शंकर दीक्षित से भेंट की गई। विधिवत पत्राचार एवं स्टांप प्रक्रिया पूर्ण करते हुए पांडुलिपियों का हस्तांतरण संपन्न कराया गया। कार्यक्रम के दौरान संस्थान के मुख्य सहयोगी श्री राजकुमार सिंह जी उपस्थित रहे। साथ ही आशू सिंह जी एवं राघवेंद्र दीक्षित गवाह के रूप में मौजूद रहे, जिनकी उपस्थिति में यह ऐतिहासिक प्रक्रिया पूर्ण हुई। इसी क्रम में संस्थान के प्रतिनिधियों द्वारा 19वीं सदी के खैराबाद के नाज़िम तथा महाराज लोने सिंह के दीवान रहे राजा हकीम मेहंदी अली ख़ान के प्रपौत्र श्री मोहसिन मेहंदी अली ख़ान से भी भेंट की गई। इस भेंट में क्षेत्रीय इतिहास, प्रशासनिक परंपराओं एवं ऐतिहासिक स्रोतों पर सार्थक चर्चा हुई, जिसे भविष्य के शोध कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना गया। इसी के साथ महाराज लोने सिंह द्वारा दान की गई भूमि का पत्र भी श्री मोहसिन जी से प्राप्त हुआ जिस में महाराज लोने सिंह जी की मुहर एवं हस्ताक्षर थे। श्री गोकर्ण शोध कला एवं संस्कृति संस्थान ने आश्वस्त किया कि प्राप्त पांडुलिपियों का वैज्ञानिक पद्धति से संरक्षण, अध्ययन एवं इतिहास लेखन में उपयोग किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय इतिहास के महत्वपूर्ण अध्याय सामने आ सकें।
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श्री गोकर्ण फाउंडेशन द्वारा संचालित श्री गोकर्ण शोध, कला एवं संस्कृति संस्थान के तत्वावधान में आयोजित खीरी इतिहास बोध कार्यक्रम का उद्देश्य लखीमपुर-खीरी जनपद के समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं सनातन वैचारिक विरासत के प्रति समाज में जागरूकता उत्पन्न करना रहा। कार्यक्रम में इतिहास लेखन की प्रक्रिया, स्थानीय इतिहास के प्रमाणिक स्रोतों तथा खीरी की सांस्कृतिक पहचान को सहेजने के महत्व पर विशेष बल दिया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगर पालिका परिषद, गोला गोकर्णनाथ के माननीय अध्यक्ष श्री विजय शुक्ल ‘रिंकू’ रहे, जिन्होंने खीरी के इतिहास संरक्षण को दायित्व बताते हुए ऐसे आयोजनों को समय की आवश्यकता बताया। मुख्य समागत के रूप में श्री प्रेम गुप्ता, प्रबंधक, गोला टूरिज्म संगठन उपस्थित रहे, कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. सौरभ दीक्षित, प्रधानाचार्य, गांधी स्मारक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय द्वारा की गई, जिन्होंने इतिहास को केवल अध्ययन का विषय नहीं बल्कि समाज की चेतना का आधार बताया। विशिष्ट अतिथि के रूप में श्याम किशोर अवस्थी, प्रधानाचार्य, मां शारदे विद्या मंदिर उपस्थित रहे, जिन्होंने सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण पर बल दिया। कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक विक्रांत सिंह परमार ने लखीमपुर-खीरी के इतिहास, गोकर्णनाथ की पौराणिक परंपरा, राजवंशों, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक योगदान पर आधारित शोधपरक प्रस्तुति दी। उनके साथ गोला टूरिज्म संगठन के सचिव मिलिंद कुमार शुक्ल, संस्थान के विशेष सदस्य सिद्धांत सिंह राठौड़ एवं अनिकेत अवस्थी, गोला टूरिज्म संगठन के सदस्य राजेंद्र सोनी, तथा संगठन के मीडिया समन्वयक वीरेंद्र कुमार गुप्ता ‘वीनू’ की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का प्रारंभ खेरी नस्ल की गाय के पूजन से हुई। इसके उपरांत खीरी के राजवंशों, खीरी नाम की उत्पत्ति, क्षेत्र के प्रमुख मंदिरों, महाराजा लोने सिंह सहित अन्य शासकों के साहित्यिक योगदान, स्वतंत्रता संग्राम में जनपद की भूमिका तथा पुरातात्त्विक साक्ष्यों के माध्यम से खीरी के ऐतिहासिक महत्व को विस्तार से प्रस्तुत किया गया। अंत में संस्थान के ध्येय वाक्य “वृत्तं यत्नेन संरक्षेत” के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि इतिहास, संस्कृति और विरासत की रक्षा केवल संस्थानों का नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।
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